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देसी ब्रांड, जो बने भारत की पहचान

ब्रांडेड वस्तुओं के प्रति दिवानगी क्या आज की पीढ़ी तक ही सीमित है? ना जी ना… खुद को विशिष्ट दिखाने की इच्छा तो सदा से रही है.

राडो, मोबला, नाइकी, गुसी.. अब अनजाने से ब्रांड नहीं रहे, इनके उपभोग में लग्जरी है, अहं की तुष्टी है, विशिष्टता का अहसास है. ऐसे ही  देसी ब्रांड भी रहे हैं जिसने कभी भारतीयों को लग्जरीपन का अहसास करवाया था, हमारी जिंदगी के हिस्सा बन गए थे. बाजार में वे भारत की पहचान थे. उनका अस्तित्व आज भी है, मगर समृद्ध होते भारत के लिए अब शायद वे उतने लग्जरीपन का अहसास नहीं करवाते. ठीक है, भले ही न करवाए मगर अपनी विशिष्ट भारतीय पहचान के साथ आज भी हमारे दिल के करीब तो है हीं.

downloadकपड़ों में रैमंड. शादी-ब्याह हो और सुट सिलवाना हो तो रैमंड के ब्रांडेड कपड़े का ही सिलवाने में मजा था/है. उच्च पदस्थ व्यक्ति हो या दुल्हे के पिता जैसा रूतबे वाला व्यक्ति हो, ‘कम्पलिट मैन’ के लिए रैमंड के कपड़े सिलवाना शान की बात रही है.

छवि ब्रांड कंसलटिंग, अहमदाबाद के संस्थापक। हिंदी में पहली पीढ़ी के जाने माने ब्लॉगर एवं वेब लेखक। वेब अनुप्रयोगों के हिंदीकरण में सक्रिय भूमिका। विज्ञान एवं तकनीक आधारित पुरस्कृत हिंदी पोर्टल ‘तरकश.कॉम’ के संपादक रहे। वेब पोर्टल निर्माण और रखरखाब के क्षेत्र में 10 साल से कार्यरत।

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2015 Chhavi