All posts by Sanjay Bengani

बेहतर अनुवाद के साथ-साथ अब गूगल सर्च में हिंदी शब्दकोश के परिणाम भी होंगे शामिल

गूगल ने मंगलवार को घोषणा की कि कंपनी अपने उत्पादों में भारतीय भाषाओं के लिए बेहतर समर्थन प्रस्तुत करने जा रहा है।

गूगल ने मंगलवार को घोषणा की कि वह अपने उत्पादों में भारतीय भाषाओं के लिए बेहतर समर्थन प्रस्तुत करने जा रहा है। पिछले महीने हिन्दी के लिए मशीन-लर्निंग आधारित अनुवाद के लिए समर्थन शुरू करने के बाद, अब वह 9 अन्य भारतीय भाषाओं को अपने ‘प्राकृतिक मशीनी अनुवाद’ में शामिल करने जा रहा है । कंपनी अपने क्रोम ब्राउज़र के अंतर्निहित स्वतः अनुवाद कार्यक्षमता को नई अनुवाद तकनीक से सक्षम करने जा रही है। इसके अतिरिक्त, यह घोषणा भी की गई है कि उसके ‘जी-बोर्ड’ नामक कीबोर्ड एप अब सभी 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं का समर्थन करेगा। इतना ही नहीं गूगल खोज परिणामों में अब हिंदी शब्दकोश के परिणाम भी शामिल होंगे.

कुल मिला कर भारतीय भाषाओं में आपस में अनुवाद के लिए अब उन्नत तकनीक को शामिल किया गया है. इससे अनुवाद को ‘स्वाभाविक’ बनाने में सहायता मिलेगी. इस तकनीक से पूरे वाक्यों का अनुवाद होगा, न की टुकड़ों में.

गूगल अपने क्रोम ब्राउज़र में अंतर्निहित स्वतः अनुवाद कार्यक्षमता को नई अनुवाद तकनीक से सक्षम करने जा रही है। इसकी सहायता से भारतीय उपयोगकर्ता विदेशी भाषाओं की वेब साइटों को अब ९ भारतीय भाषाओं में अनुवाद कर देख सकेंगे.

इतना ही नहीं गूगल अपनी नई ‘स्वतः मशीनी प्राकृतिक अनुवाद’ तकनीक को गूगल मानचित्र में भी शामिल करने जा रहा है. इससे उपयोगकर्ता अब रेस्तरां, होटल, कैफे वगेरे के अनुवादित रिव्यू को अपनी भाषाओं में पढ़ पाएंगे.

गूगल सर्च में अब उपयोगकर्ता राजपाल एंड साँस हिंदी शब्दकोश के परिणाम भी देख पाएंगे. इसके लिए खोज के बक्शे में इच्छित शब्द को लिख कर ‘का मतलब’ लिखने पर उस शब्द का अर्थ, शब्दकोश से परिभाषा तथा शब्द सम्बन्धी वेब परिणाम प्राप्त होंगे.

उल्लेखनीय है की भारत में २३ करोड़ ४० लाख भारतीय भाषाई इंटरनेट उपयोग करता है. वहीं अंगरेजी जानने वाले १७ करोड़ लोग ही नेट का उपयोग कर रहे है. ऐसे में गूगल की यह पहल भारत में नेट का बेहतर अनुभव देने और अपनी सेवाओं को विस्तार देने का सशक्त प्रयास है.

छवि ब्रांड कंसलटिंग, अहमदाबाद के संस्थापक। हिंदी में पहली पीढ़ी के जाने माने ब्लॉगर एवं वेब लेखक। वेब अनुप्रयोगों के हिंदीकरण में सक्रिय भूमिका। विज्ञान एवं तकनीक आधारित पुरस्कृत हिंदी पोर्टल ‘तरकश.कॉम’ के संपादक रहे। वेब पोर्टल निर्माण और रखरखाब के क्षेत्र में 10 साल से कार्यरत।

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एक ‘प्रोडक्टिव’ दिन के लिए

जितने काम निपटा सकता था उससे आधे ही ख़त्म कर सका. जबकि इससे कहीं अधिक कार्य-सूचि ख़त्म की जा सकती थी. फिर समस्या कहाँ रही?

ऑफिस से निकला हूँ और घर की ओर कार ड्राइव करते हुए गुजर गए दिन की गतिविधियों पर सोच रहा हूँ. एक असंतुष्टि-सी मन में है. जितने काम निपटा सकता था उससे आधे ही ख़त्म कर सका. जबकि इससे कहीं अधिक कार्य-सूचि ख़त्म की जा सकती थी. फिर समस्या कहाँ रही?
जिन कारणों से कार्यक्षमता अनुरूप कार्य न हो पाए उनकी सूचि मन ही मन बनानी शुरू की और घर पहुंचते पहुंचते ‘करने और न करने’ की एक सूचि बन गई.

छवि ब्रांड कंसलटिंग, अहमदाबाद के संस्थापक। हिंदी में पहली पीढ़ी के जाने माने ब्लॉगर एवं वेब लेखक। वेब अनुप्रयोगों के हिंदीकरण में सक्रिय भूमिका। विज्ञान एवं तकनीक आधारित पुरस्कृत हिंदी पोर्टल ‘तरकश.कॉम’ के संपादक रहे। वेब पोर्टल निर्माण और रखरखाब के क्षेत्र में 10 साल से कार्यरत।

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किन कारणों से UI डिजाइनर हो जाते है महत्त्वपूर्ण ?

आपका सोफ्टवेर/उत्पाद भले ही दमदार बनाया गया हो, उपयोग में और समझाने में सरल न हो तो उपयोगकर्ता की दृष्टि में वह एक बेकार की चीज हो जाता है वहीं उपयोग में और सीखने में सरल इंटरफेस ग्राहक की वफादारी को हमेशा के लिए जीत लेता है.

जब कोई बेहद सुविधा युक्त दमदार-सा सोफ्टवेर किसी साधारण से सोफ्टवेर से पिट जाता है तो बहुत अधिक संभावना है कि उसकी यूजर-इंटरफेस की कमजोरी ही इसके लिए जिम्मेदार हो. क्योंकि किसी सफल सोफ्टवेर के पीछे उसका यूजर इंटरफेस बहुत ही महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

छवि ब्रांड कंसलटिंग, अहमदाबाद के संस्थापक। हिंदी में पहली पीढ़ी के जाने माने ब्लॉगर एवं वेब लेखक। वेब अनुप्रयोगों के हिंदीकरण में सक्रिय भूमिका। विज्ञान एवं तकनीक आधारित पुरस्कृत हिंदी पोर्टल ‘तरकश.कॉम’ के संपादक रहे। वेब पोर्टल निर्माण और रखरखाब के क्षेत्र में 10 साल से कार्यरत।

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कार्य स्थल को खुशनुमा कैसे बनाएं?

कार्य-स्थल पर काम के बोझ और तमाम तरह के दबावों के बाद भी खुश रहा जा सकता है?

जब यह सवाल मेरे सामने आया तो मैने जो अपने सह-कर्मियों से कहा वही यहाँ ब्लॉग के रूप में प्रस्तुत है.

छवि ब्रांड कंसलटिंग, अहमदाबाद के संस्थापक। हिंदी में पहली पीढ़ी के जाने माने ब्लॉगर एवं वेब लेखक। वेब अनुप्रयोगों के हिंदीकरण में सक्रिय भूमिका। विज्ञान एवं तकनीक आधारित पुरस्कृत हिंदी पोर्टल ‘तरकश.कॉम’ के संपादक रहे। वेब पोर्टल निर्माण और रखरखाब के क्षेत्र में 10 साल से कार्यरत।

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देसी ब्रांड, जो बने भारत की पहचान

ब्रांडेड वस्तुओं के प्रति दिवानगी क्या आज की पीढ़ी तक ही सीमित है? ना जी ना… खुद को विशिष्ट दिखाने की इच्छा तो सदा से रही है.

राडो, मोबला, नाइकी, गुसी.. अब अनजाने से ब्रांड नहीं रहे, इनके उपभोग में लग्जरी है, अहं की तुष्टी है, विशिष्टता का अहसास है. ऐसे ही  देसी ब्रांड भी रहे हैं जिसने कभी भारतीयों को लग्जरीपन का अहसास करवाया था, हमारी जिंदगी के हिस्सा बन गए थे. बाजार में वे भारत की पहचान थे. उनका अस्तित्व आज भी है, मगर समृद्ध होते भारत के लिए अब शायद वे उतने लग्जरीपन का अहसास नहीं करवाते. ठीक है, भले ही न करवाए मगर अपनी विशिष्ट भारतीय पहचान के साथ आज भी हमारे दिल के करीब तो है हीं.

downloadकपड़ों में रैमंड. शादी-ब्याह हो और सुट सिलवाना हो तो रैमंड के ब्रांडेड कपड़े का ही सिलवाने में मजा था/है. उच्च पदस्थ व्यक्ति हो या दुल्हे के पिता जैसा रूतबे वाला व्यक्ति हो, ‘कम्पलिट मैन’ के लिए रैमंड के कपड़े सिलवाना शान की बात रही है.

छवि ब्रांड कंसलटिंग, अहमदाबाद के संस्थापक। हिंदी में पहली पीढ़ी के जाने माने ब्लॉगर एवं वेब लेखक। वेब अनुप्रयोगों के हिंदीकरण में सक्रिय भूमिका। विज्ञान एवं तकनीक आधारित पुरस्कृत हिंदी पोर्टल ‘तरकश.कॉम’ के संपादक रहे। वेब पोर्टल निर्माण और रखरखाब के क्षेत्र में 10 साल से कार्यरत।

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2015 Chhavi